वो टेलिस्कोप जिसे दुसरे ग्रहों पर जीवन का पता लगाने के लिए बनाया गया था

हम इंसानों ने जब से अंतरिक्ष के बारे में जानने की कोशिश जारी है , और अंतरिक्ष के बारे में हमारी सोच और ज्ञान में लगातार बदलाव होते रहते है | और बीते कुछ सालों में हमने जितना अन्तरिक्ष में बारे में जाना है उतना हम बीते पीछे हजारों सालों में भी नही जान पाए थे | ये सब मुमकिन कैसे हुआ ?

ये मुमकिन हुआ गलेलियो गलिएली के उस आविष्कार से जिसने पहली बार हमें अंतरिक्ष का एक साफ नजारा दिखाया था | जी हां , हम बात कर रहे है टेलिस्कोप की | इस आर्टिकल में हम जानेंगे उस टेलिस्कोप के बारे जिसने अंतरिक्ष के कई राज हमारे सामने उजागर किये |

केप्लेर स्पेस टेलिस्कोप

केप्लेर टेलिस्कोप एक स्पेस टेलिस्कोप था | जिसे अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने बनाया था और इसे 7 मार्च  को 2009 अंतरिक्ष में भेजा गया था | इस टेलिस्कोप का मकसद था पृथ्वी जैसे दुसरे ग्रहों का अंतरिक्ष में पता लगाना | इस टेलिस्कोप ने 2660 दुसरे ग्रहों का पता लगाया और करीब 530500 तारों को जानकारी नासा तक पहुचाई |

केप्लेर टेलिस्कोप की उपलब्धियां

ये पहला टेलिस्कोप था जिसने हमने बताया की दुसरे तारों के भी ग्रह होते है और ग्रहों की संख्या तारों के मुकाबले काफी ज्यादा है |  इस बात से आप अंदाजा लगा सकते है की दुसरें ग्रहों पर जीवन मिलने की संभवाना कितनी ज्यादा बढ़ जाती  है |

केप्लेर टेलिस्कोप के डाटा के अनुशार हम इंसान पृथ्वी से आसमान में मौजूद केवल 20 से 50 प्रतिशत तारों को ही देख पाते है | तारों की संख्या काफी ज्यादा है | और पृथ्वी की तरह कई ग्रह उनका चक्कर लगा रहे है |

दुसरे तारों के ग्रह जिन्हें हम एक्सोप्लानेट (exoplanet) के नाम जानते है उनकी बनावट में काफी अंतर होते है और केप्लेर ने कई अजीबों गरीब तारे देखे है | एक हीरों (diamond) से बने तारे का भी पता केप्लर टेलिस्कोप ने ही लगाया था |

जानते हैं मैरी बोनापार्ट को जिन्होंने महिलाओं में चरमसुख पर रीसर्च की

केप्लेर टेलिस्कोप के अनुशार दुसरे तारों के भी परिवार होते है जैसे हमारे सूर्य का परिवार है जिसे हम सौरमंडल के नाम से जानते है | लेकिन दुसरे तारों के ग्रह एक दुसरे से काफी नजदीक होते है | आपको जानकर हैरानी होगी की केप्लेर ने 5 लाख से भी ज्यादा तारों का अवलोकन (observation) किया है |

सुपरनोवा (supernova) का नाम सब ने सुना होगा | सुपरनोवा उस घटना को कहते है जब एक तार अपने आखिरी समय में होता है  और एक धमाके के साथ अपना अंत खुद कर लेता है | इस घटाने के बारे में वैज्ञानिकों को साड़ी जानकारी केप्लेर स्पेस टेलिस्कोप ने ही दी थी |

केप्लेर टेलिस्कोप का अंत

30 अक्टूबर 2018 को नासा ने केप्लेर स्पेस टेलिस्कोप का फ्यूल खत्म के बाद उसे औपचारिक तौर पर रिटायर कर दिया | लेकिन केप्लेर के योगदान को हम कभी नही भूल सकते है | इस टेलिस्कोप ने 9 साल 7 महीनो तक हमें अंतरिक्ष की अद्भुत जानकारियां और तस्वीरें भेजी |

क्या चाँद एक कब्रिस्तान है? -Is the moon a graveyard?

 

Related posts