Konark Sun Temple: कोणार्क में भगवान सूर्यदेव को समर्पित मंदिर है, जो कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। कोणार्क का यह मंदिर भारत के उड़ीसा राज्य में स्थित है। यह उड़ीसा में स्थित जगन्नाथ पुरी से लगभग 35 किलो की दूरी पर कोणार्क नामक शहर में बनाया गया है। इस मंदिर (Konark Sun Temple) को बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से बनाया गया है। दुनिया भर से श्रद्धालु भगवान सूर्य लदेव के दर्शन करने के लिए यहाँ आते है। पर्यटक भी इस मंदिर का अवलोकन करने के लिए यहां पर आते रहते हैं।
Konark Sun Temple : इतिहास –
कोणार्क स्थित सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple) को को यूनेस्को ने 1984 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्रदान की थी। कोणार्क मंदिर के निर्माण के संबंध में इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि कोणार्क के सूर्य देव मंदिर का निर्माण गंग वंश के शासक राजा नरसिंह देव द्वारा कराया गया था। वहीं कुछ इतिहास का यह तर्क देते हैं कि गंग वंश के शासक राजा नरसिंह देव की मृत्यु के बाद कोणार्क में स्थित सूर्यदेव मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका था।
वर्तमान समय में मंदिर का (Konark Sun Temple) अधूरा ध्वस्त ढांचा ही मौजूद है। लोग इसका प्रमुख कारण राजा नरसिंह देव की मृत्यु को भी कहते हैं। हालांकि इस बात की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हो पाई है। इतिहासकारों का मानना है कि 1260 ई. में कोणार्क स्थित सूर्य देव मंदिर (Konark Sun Temple) का निर्माण हो गया था। जबकि इतिहास में राजा नरसिंह देव का शासन काल 1282 तक का रहा है। वास्तविकता जो भी हो कोणार्क मंदिर सूर्य देव मंदिर ऐतिहासिक स्थल के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है। आइए जानते हैं सूर्य देव मंदिर से जुड़े कुछ रोचक जानकारियों को –
सूर्यदेव मंदिर से जुड़ी रोचक कथा –
कोणार्क स्थित सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple) से जुड़ी कथा कोणार्क स्थित सूर्य देव मंदिर के संबंध में कई सारी कथाएं कहीं जाती हैं। मंदिर की स्थापना के संबंध में एक कथा काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब शापित थे और उन्हें कोढ़ रोग था। कालांतर में श्रीकृष्ण पुत्र साम्ब ने मित्र वन में चंद्रभागा नदी के तट पर भगवान सूर्य देव की कठिन उपासना की थी। जिससे वह अपने रोगों से मुक्ति पा सके। भगवान सूर्य को वैध भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि भगवान सूर्य देव की उपासना करने से ही साम्ब को सभी रोगों से मुक्ति मिल गई थी। साम्ब की आराधना से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उसको बिल्कुल ठीक कर दिया था। इसके बाद साम्ब ने कोणार्क में भगवान सूर्य देव की मंदिर (Konark Sun Temple) का निर्माण कराया.
ऐसा बताया जाता है कि जब साम्ब चंद्रभागा नदी में स्नान कर रहे थे तभी उन्हें भगवान सूर्य देव की एक मूर्ति मिली थी। जिसका निर्माण वास्तु विशेषज्ञ कहे जाने वाले विश्वकर्मा जी ने की थी। कालांतर में मित्र वन में सामने भगवान सूर्य देव का मंदिर (Konark Sun Temple) बनवाया और वहां पर इस मूर्ति की स्थापना की गई।
कोणार्क मंदिर वास्तुकला –
कोणार्क स्थित सूर्य देव मंदिर (Konark Sun Temple) अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। यह उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी से 35 किलोमीटर की दूरी पर वर्तमान समय में कोणार्क नामक स्थान पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण कलिंग वास्तुकला के प्रयोग से बनाया गया है। इस मंदिर के निर्माण में बलुआ पत्थर का इस्तेमाल हुआ है।
कोणार्क स्थान के बारे में कहा जाता है कि यह दो शब्दों – कोण और अर्क से मिल कर बना है। कोण का अर्थ होता है मंदिर, अर्क का अर्थ होता है सूर्य देव। इस मंदिर में भगवान सूर्य देव कोरथ पर सवार दिखाया गया है।
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