अजब ग़ज़ब रोचक

ये प्रसिद्ध दोहे जो बदल देंगे आपकी जिंदगी

दोहे जो समझाते हैं ज़िंदगी का मर्म

1) “निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय”।

दोहे का अर्थ – हमे अपने आलोचकों की बातों पर भी ध्यान देना चाहिए क्यों कि ये आलोचक ही हमारी कमजोरियों को प्रकाशित करते है जिन्हें दूर करके अपने स्वयं को सुधार सकते हैं। अर्थात हमें अपने विरोधी का भी सम्मान करना चाहिए ।

2) ”जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना; जहाँ कुमति तहाँ बिपति निदाना”

दोहे का अर्थ – सद्बुद्धि से सुविचार, सद्-व्यवहार, प्रेम, संतोष, सहयोग, सम्मान की प्राप्ति होती है। यही तो असली सम्पत्ति है। जहाँ बुद्धि कुमार्ग पर चली जाती है, वहाँ कलह, असंतोष, कदाचार, दुर्व्यसन आदि का बोलबाला रहता है और विनाश का मार्ग खुल जाता है।

3) ”सबै सहायक सबल के, कोऊ न निबल सहाय,पवन जगावत आग कौ ,दीप हिं देत बुझाई”

दोहे का अर्थ – सभी लोग बलवान (अमीरों) की सहायता को आते हैं, कमजोर (गरीब) की सहायता को कोई नहीं आगे बढ़ता। यह ठीक वैसे ही है जैसे हवा आग को और भी लहका देती है, किंतु दीये को बुझा देती है।

4) ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी। ये सब ताड़न के अधिकारी

दोहे का अर्थ – ढोलक तभी अच्छी धुन निकालेगी जब आपको उसे बजाना आता हो। यानि कि ताड़ना आता हो। गंवार अधिक शक्तिशाली है तो उससे उलझने की कोशिश न करें उसे ताड़लें और उससे दूर रहें क्योंकि वह किसी भी तरह से आपकी बात नहीं मानने वाला वह आपके द्वारा कहे गए सच को भी नकार देगा। शूद्र जो बुरे कर्मों को करने वाला है उसे समझो (ताड़ना) और उसे दूर रहो। पशु यदि मारने वाला है मारने को दौड़ता है तो उससे दूर रहें। नारी यदि सही नहीं है तो उसकी संगत छोड़ दें, नारी को समझा कर प्रेम से रास्ते पर लाएं, उसे समझे और समझाएं, न समझे तो चुपचाप रास्ते से निकल जाए

4) जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना; जहाँ कुमति तहाँ बिपति निदाना’ 

दोहे का अर्थ – जो व्यक्ति बुद्धिमत्ता (सुमति) पूर्वक, अपना और दूसरों का भला-बुरा ध्यान में रखकर, विचार-विमर्श करता है, और उसी के अनुसार निर्णय लेता है, वह व्यक्ति सुख, शांति, संपत्ति आदि की प्राप्ति करता है। वहीँ इसके उलट, जो व्यक्ति अहंकारवश बिना सोचे विचारे कार्य करता है, वह न तो खुद सुखी रहता और न ही उसके आस पास रहने वाले और उसका परिवार सुखी रहते, वहां निर्धनता बनी रहती है|

5) “तन को जोगी सब करे, मन को विरला कोय ।

सहजे सब विधि पाइए, जो मन जोगी होए”।

दोहे का अर्थ – हम लोग रोजाना अपने शरीर को साफ़ करते हैं लेकिन मन को कोई साफ़ नहीं करता। जो इंसान अपने तन के साथ साथ मन को भी साफ़ करता है वही सच्चा इंसान कहलाने लायक है।

6) ” तुलसी इस संसार में, भाँति-भाँति के लोग,

सबसे हँस-मिल बोलिए, नदी नाव संजोग॥”

दोहे का अर्थ – इस संसार में तरह-तरह के लोग रहते हैं. आप सबसे हँस कर बोलो और मिल-जुल कर रहो तो जैसे नाव नदी से संयोग कर के पार लगती है वैसे ही आप भी इस भव सागर को पार कर लोगे

7) नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए,

मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए ।

दोहे का अर्थ – एक व्यक्ति कितना भी नहा धो ले, लेकिन अगर उसका मन साफ़ नही है तो उसके नहाने का कोई फायदा नही, जैसे मछली हमेशा पानी में रहती है लेकिन साफ़ न होने से मछली से तेज बदबू आती है।

8) “रामचन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा, हंस चुगेगा दाना दुनका ओर कौआ मोती खाएगा”

दोहे का अर्थ – जैसा कि सब को मालूम ही है कि हंस मोती चुगता(खाता) है और कौआ दानें, लेकिन कलयुग अर्थात खराब समय में जब नैतिकता लगभग नगण्य होगी तब कौआ मोती खाने लगेगा और हंस दानें चुगने को बाध्य हो जाएगा अर्थात योग्यतम की उत्तरजीविता का सिद्धांत निरर्थक हो जायेगा। अर्थात अयोग्य (कौआ) उत्कृष्ट पदों से नवाजे जायेंगे जबकि योग्य (हंस) विकल्पहीनता की स्थिति में निकृष्ट कार्य करने को मजबूर होंगे,  उनकी योग्यता का अनादर होगा और नैतिक पतन के परिणामस्वरूप समाज विनाश की ओर अग्रसर होगा (इसव कलयुग कहा जायेगा)।

9) “ऊँचे कुल का जनमिया, करनी ऊँची न होय ।

सुवर्ण कलश सुरा भरा, साधू निंदा होय”।

दोहे का अर्थ –   ऊँचे कुल में जन्म ले लिया लेकिन अगर कर्म ऊँचे नहीं है तो ये तो वही बात हुई जैसे सोने के लोटे में जहर भरा हो तो उसकी  चारों तरफ निंदा होती है।

10) “आये है तो जायेंगे, राजा रंक फ़कीर।

इक सिंहासन चढी चले, इक बंधे जंजीर।

दोहे का अर्थ – जो इस दुनियां में आया है उसे एक दिन जरूर जाना है। अर्थात मृत्यु निश्चित है। फिर वह चाहे राजा हो या फ़क़ीर, मृत्य के यमदूत सबको एक ही जंजीर में बांध कर मृत्युलोक ले जायेंगे।

Archana Yadav

मुझे नए नए टॉपिक्स में लेख लिखना पसंद हें, मेरे लेख पढ़ने के लिए शुक्रिया आपको केसा लगा कॉमेंट करके ज़रूर बताए.

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