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आइए जानते हैं नंबर पोर्टिबिलिटी से जुड़े कुछ काम की बातें

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी(Mobile Number Portability In Hindi) की सेवा काफी समय से शुरू कर दी गई है। लेकिन आज भी इसके बारे में लोगों को कम जानकारी है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सुविधा के जरिए लोग अपने मोबाइल ऑपरेटर को बदलकर किसी दूसरे पसंद के ऑपरेटर की सेवा आसानी से ले सकते हैं। आज हम जानेंगे मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी से जुड़ी कुछ बातों के बारे में, जिन्हें जानना जरूरी है –

क्या है मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी (What is MNP in Hindi)-


मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी एक ऐसी सुविधा है जिसमे एक दूरसंचार सेवा के उपभोगता एक ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर में हस्तांतरित करने की अनुमति पाते हैं। इसमें भौगोलिक क्षेत्र भी बदलने की सुविधा रहती है, जैसे – दिल्ली से उत्तर प्रदेश। यदि कोई ग्राहक अपने वर्तमान ऑपरेटर द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं से संतुष्ट नही है तो वह अपना मोबाइल नंबर बदले बिना किसी दूसरे पसंद के ऑपरेटर की सेवा ले सकता है।  जैसे – कोई ग्राहक यदि वोडाफोन का है और वह वोडाफोन ऑपरेटर द्वारा मिलने वाली सेवा से  संतुष्ट नहीं है तो वह दूसरे ऑपरेटर (जिओ, एयरटेल, बीएसएनल आदि) की सेवाएं ले सकता है।

यूनिक पोर्टिंग कोड कैसे प्राप्त करें –


मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी के लिए सबसे जरूरी है एक यूनिक वोटिंग कोड। ईद कोर्ट के जरिए ही मोबाइल नंबर दूसरे ऑपरेटर पर पोर्ट होता है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के लिए कुछ शर्ते भी हैं – जैसे कि यदि आप वर्तमान ऑपरेटर के नेटवर्क में 90 दिन से एक्टिव नही है तब आपका मोबाइल नंबर पोर्ट नही हो सकता। अर्थात कम से कम 90 दिन बाद ही मोबाइल नंबर एक ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर को पोर्ट किया जा सकता है।

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया (Process Of MNP)-


जो ग्राहक अपने मौजूदा ऑपरेटर की सर्विस से खुश नही है और अपना मोबाइल नंबर दूसरे ऑपरेटर से पोर्ट करना चाहता है तो वह PORT लिखकर 1900 पर मैसेज भेज सकता है। इसके बाद ग्राहक के नंबर पर एक यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) का मैसेज आता है। इसके बाद किसी नजदीकी टेलीकॉम दुकान पर जाकर अपना पहचान पत्र और फोटो आईडी दे कर उसी नंबर का नया सिम प्राप्त कर सकते हैं। 3 से 5 दिन के अंदर मोबाइल नंबर के पोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। हालांकि कॉर्पोरेट नंबर के वोटिंग के मामले में मोबाइल नंबर को एक ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर में पोर्ट होने के लिए 5 दिन का समय लग जाता है।

 वही जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों में पोर्टिंग के लिए लगभग 15 दिन का समय लगता है।

 नया सिम चालू होने से पहले ग्राहक के नंबर पर एक एसएमएस (SMS) आता है जिसमें पोर्टिंग की तारीख और समय की जानकारी दी गई रहती है।

पोर्ट होने के बाद इस तरह करें नया सिम एक्टिव –


मोबाइल नंबर पोर्ट होने के बाद तय समय और तारीख पर मौजूदा मोबाइल नंबर का नेटवर्क गायब हो जाता है। तब उसमें नया सिम डाला जा सकता है। फिर थोड़ी देर बाद नेटवर्क आ जाता है। इसके बाद सिम कार्ड के पैकेट पर दिए गए नंबर पर फोन करके ग्राहक को वेरिफिकेशन कराना रहता है और फिर नये ऑपरेटर द्वारा सेवाएं शुरू हो जाती हैं।

पोर्ट को कैसे वापस ले –


कई बार यदि आप अपने नंबर की पोर्ट के लिए 1900 पर मैसेज भेज देते हैं लेकिन पोर्ट करने के प्लान में बदलाव हो जाने पर 24 घंटे के अंदर आप अपने पोर्टिंग के अनुरोध को वापस भी ले सकते हैं। पोर्टिंग को वापस लेने के लिए 24 घंटे के अंदर CANCLE मैसेज लिख कर 1900 पर भेजना होता है।

मोबाइल नंबर पोर्ट करने के लिए शुल्क –


मोबाइल नंबर पोर्ट करने पर प्रति पोर्ट ट्रांजैक्शन चार्ज के रूप में केवल सिम कार्ड की कीमत ली जाती है। यह लगभग 6.46 रुपए होती है। इसके बाद पहला रिचार्ज करना होता है। जो कि कंपनी के प्लान पर निर्भर करता है और ग्राहक अपनी सुविधानुसार प्लान यूज कर सकते हैं।

ध्यान रहे मोबाइल नंबर पोर्ट करने के बाद मौजूदा नंबर पर मिलने वाली पहले की सभी सेवाएं और बैलेंस खत्म हो जाता है।

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Archana Yadav

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