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आइए जानते हैं सरकारी वकील कैसे बने, पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से

प्रत्येक व्यक्ति अपनी रूचि और अपनी क्षमता के अनुसार अपना कैरियर बनाना चाहता है। आज के युवाओं में सरकारी वकील बनने का क्रेज है। सरकारी वकील को प्रॉसिक्यूशन (Prosecution officer या Public Prosecution कहा जाता है। आज बहुत सारे युवा यह जानना चाहते है कि सरकारी वकील कैसे बने। सरकारी वकील का पद काफी मान सम्मान की बात मानी जाती है। सरकारी वकील को अच्छा वेतन के साथ साथ समाज मे काफी सम्मान भी प्राप्त होता है।

सरकारी वकील न्यायालय में सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। वह सरकार के पक्ष को न्यायालय में रखता है तथा सरकार की नीतियों को सही साबित करता है।

प्रत्येक राज्य में हाई कोर्ट केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा न्यायालय में अपील अथवा न्यायिक कार्रवाई के लिए प्रोविजन ऑफ सेक्शन की सीआरपीसी 1972 के तहत पब्लिक प्रॉसिक्यूटर यानी कि सरकारी वकील को चुना जाता है। प्रत्येक जिले में राज्य सरकार द्वारा एक सरकारी वकील यानी कि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति होती है। राज्य सरकार सरकारी वकील की नियुक्ति लॉ एंड आर्डर (Law and order) को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए करती है।

सरकारी वकील के काम (Work of Public Prosecution) –

सरकारी वकील का प्रमुख कार्य न्यायालय के कार्य में सरकार का प्रतिनिधित्व करना है। एक सरकारी वकील राज्य सरकार के मुकदमे की पैरवी करता है और सरकार के आदेश के अनुसार मुकदमे की कार्यवाही की प्रक्रिया में भाग लेता है। अगर कोई पीड़ित शख्स वकील का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं होता है तो न्यायालय द्वारा उसको वकील दिया जाता है। सरकारी वकील तब पीड़ित व्यक्ति के मुकदमे की पैरवी करता है और पीड़ित व्यक्ति से इसके लिए कोई भी चीज नहीं लिए जाते हैं। 

सरकारी वकील बनने के लिए जरूरी Skill – 

सरकारी वकील बनने के लिए व्यक्ति में निम्न लिखित गुण स्किल होना चाहिए –

  • बेहतर कम्युनिकेशन स्किल 
  • बौद्धिक क्षमता 
  • तर्क वितर्क करने की क्षमता 
  • प्रेजेंटेशन स्किल 
  • राइटिंग स्किल 
  • कानून का ज्ञान 
  • मुकदमे बाजी करने में कुशलता
  • रचनात्मकता विश्लेषण करने की क्षमता

सरकारी वकील की नियुक्ति के क्षेत्र –

 सरकारी वकील की नियुक्ति कई क्षेत्रों में की जाती है, जैसे –

  • Judiciary
  • रेलवे 
  • पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर 
  • Public Transit
  • पब्लिक एजुकेशन
  • म्युनिसिपल कॉरपोरेशन 
  • मैन्युफैक्चरिंग 
  • मिलिट्री
  • रोडवेज 
  • रियल एस्टेट
  • हेल्थ केयर 
  • पॉलीटिकल पार्टीज 
  • एग्रीकल्चर
  • कंस्ट्रक्शन
  • इंफोर्समेंट आदि

सरकारी वकील कैसे बने (How to become Public Prosecution)

सरकारी वकील बनने के लिए आवश्यक योग्यता लॉ में बैचलर डिग्री होना है। 12वीं के बाद ही 5 वर्ष के BA LLB का कोर्स के जरिए किया जा सकता है या 3 वर्षीय LLB कोर्स भी कर सकते हैं।  वकील कैसे बनते हैं वकील बनने की क्या योग्यता होती है इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए देखे वकील (LAWYER) कैसे बनते है, योग्यता क्या होती है? जानिए पूरी जानकारी

Law कोर्स करने के बाद एडवोकेट के रूप में आपको काउंसिल ऑफ इंडिया में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। सरकारी वकील दो तरह से बना जा सकता है

  • परीक्षा के माध्यम से
  • अनुभव के माध्यम से

सरकारी वकील बनने के लिए आवश्यक योग्यता –

  • भारतीय नागरिक होना चाहिए
  • अभ्यर्थी की उम्र कम से कम 35 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए 
  • सरकारी वकील बनने के लिए कम से कम 7 साल का अनुभव होना चाहिए

वकील बनने के लिए APO Exam – 

सरकारी वकील बनने के लिए ज्यादातर लोग एपीओ परीक्षा (APO Exam) को माध्यम के रूप में चुनते हैं। क्योंकि अनुभव हासिल करने के लिए आपको कम से कम 7 साल का इंतजार करना पड़ता है। वही एक Exam पास करके आप सरकारी वकील बन सकते हैं। हर राज्य द्वारा सरकारी वकील बनने के लिए परीक्षा आयोजित करवाती है।

हर राज्य में इस परीक्षा को अलग अलग नाम से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश में सरकारी वकील को असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफीसर (APO) बोला जाता है। मध्य प्रदेश में असिस्टेंट डायरेक्टर या प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर बोला जाता है। वही राजस्थान में असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऑफिसर बोला जाता है। परीक्षा को पास करने के बाद राज्य के किसी भी जिले के कोर्ट में नियुक्ति की जाती है। 

Eligibility for Uttar Pradesh APO Exam

उत्तर प्रदेश राज्य में एपीओ एग्जाम के आवेदक के पास निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए

  •  वह भारत का नागरिक हो
  •  आवेदक की उम्र कम से कम 21 साल और अधिकतम 35 साल होना चाहिए
  •  किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से जुड़ा में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए

सरकारी वकील बनने के लिए कौन सा रास्ता है बेहतर – 

सरकारी वकील का चयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। क्योंकि हर सरकार चाहती है कि वकील उसका प्रतिनिधित्व करने वाला होती है। उसके हिसाब से काम करें। जिसका अर्थ यह हुआ कि 5 साल बाद यदि कोई नई सरकार आती है तो वह अपने हिसाब से वकील का चयन करेगी। ज्यादातर सरकार यही करती है। ऐसे में यह कहना बहुत मुश्किल हो जाता है कि कोई भी वकील कितने सालों तक सरकारी वकील बना रहेगा। 

वहीं यदि कोई सरकारी वकील परीक्षा के माध्यम से नियुक्त किया जाता है तो उसका कार्यकाल परमानेंट होता है। इसमें सरकार के बदलने से कैसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसलिए लोग अनुभव के आधार पर सरकारी वकील बनने की तुलना में परीक्षा को पास कर के सरकारी वकील बनने को वरीयता देते हैं।

राज्यों द्वारा आयोजित की जाने वाली एपीओ परीक्षा के माध्यम से आप सरकारी वकील बनते हैं तो आपको कोई भी सरकार हटा नहीं सकती है। वहीं यदि आप अनुभव के आधार पर सरकारी वकील नियुक्त किए जाते हैं तो सरकार बदलने के साथ सरकार आपको हटा भी सकती है।

सरकारी वकील की नियुक्ति कैसे होती है –

सरकारी वकील की नियुक्ति केंद्र और राज्य सरकार द्वारा की जाती है। सरकारी वकील के रूप में नियुक्त के लिए में यज भी मायने रखता है कि आप किस कोर्ट में वकालत करना चाहते हैं, उच्च न्यायालय या जिला न्यायालय। क्योंकि सरकार को सभी वकीलों के नाम के बारे में जानकारी नहीं होती है। इसलिए सरकार तक पहुंच बनाने के लिए एक सीट बनाई जाती है जिनमें वकीलों को सूचीबद्ध किया जाता है। इनमें उन वकीलों को सूचीबद्ध किया जाता है जिन्हें लॉ एंड ऑर्डर की अच्छी समझ होती है, साथ ही केस को हैंडल करने का भी तजुर्बा होता है।

 इस सीट को कानूनी भाषा में पैनल कहा जाता है। पैनल में शामिल होने के बाद ही एक सरकारी वकील को  स्टेट और सेंट्रल गवर्नमेंट के वकील के रूप में नियुक्त मिलती है। पैनल में सूचीबद्ध वकीलों को सीट डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और सेशन कोर्ट के जज के द्वारा बनाई जाती है।

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Archana Yadav

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