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भारत में ऑक्सीजन की कमी के लिए ये कुछ प्रमुख कारण है जिम्मेदार

Story Highlights
  • क्या अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी है? 
  • मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी में देरी क्यों? 
  • क्या भारत में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है?
  • ऑक्सीजन की कमी की समस्या को हल करने के लिए भारत क्या कर रहा है?

Oxygen Crises in India: देशभर में कोरोना वायरस संकट के बीच ऑक्सीजन की कमी ने एक नई बहस छेड़ दी है। राज्य सरकारें और अस्पताल लगातार ऑक्सीजन की कमी के दावे कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि कई मरीजों की जान ऑक्सीजन की कमी की वजह से चली गई। देश की राजधानी दिल्ली के एक अस्पताल ने हाईकोर्ट में ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठाया है। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए उद्योगों को दी जाने वाली ऑक्सीजन पर तत्काल रोक लगा दी है।

देश की राजधानी दिल्ली के अस्पतालों को मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग, ट्रेन और सड़क मार्ग का सहारा लिया जा रहा है। बता दें कोरोना वायरस महामारी के दूसरी लहर में देश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी देखी जा रही है। जिसमें सबसे बढ़िया समस्या यह है कि सही समय पर अस्पताल में मरीजों के बेड तक मेडिकल ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही है। लेकिन ऐसा क्यों है इसके लिए प्रमुख रूप से तीन कारण जिम्मेदार हैं। वर्तमान समय में दिल्ली की जरूरत को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेडिकल ऑक्सीजन की पूर्ति पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों से मंगवा कर की जा रही है।

क्या अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी है? 

सबसे प्रमुख समस्या यह है कि मेडिकल ऑक्सीजन अस्पताल में बेड पर समय से नहीं पहुंच पा रही है। यह देरी उत्पादन और उत्पादन यूनिटों द्वारा वितरण प्रणाली की खामी की वजह से हो रही है। दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी है और स्टोरेज कैपेसिटी भी नही है। वे आपातकालीन ऑक्सीजन की मांग कर रहे हैं। राजधानी दिल्ली के पड़ोसी देश हरियाणा और उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन का उत्पादन तो हो रहा है लेकिन ये राज्य अपने लोकल मांग को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में दिल्ली की वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेडिकल ऑक्सीजन की पूर्ति पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्र से की जा रही है।

मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी में देरी क्यों? 

दिल्ली में अतिरिक्त ऑक्सीजन की पूर्ति बेहद दूर के सात राज्यों से हो रही है जिनके मध्य की दूरी 1000 किलोमीटर से भी अधिक है। रायटर की रिपोर्ट के अनुसार ऐसे में सभी लिक्विड ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्ट को सीमित मात्रा में एक विशेष टैंकर में रख कर कॉरिडोर की मदद से डिलीवर करने की जरूरत है। हाल के दिनों में यह भी देखने को मिला है कि राज्यों के बीच ऑक्सीजन की कमी का कारण स्थानीय अधिकारियों का अपनी स्थानीय माँग की पूर्ति के लिए टैंकरों की आवाजाही को बाधित करना भी एक कारण रहा है। दिल्ली को 377 मीट्रिक टन ऑक्सीजन में से 177 मीट्रिक बुधवार को प्राप्त हुई है

सूत्रों का कहना है कि यदि दिल्ली सरकार ऑक्सीजन आपूर्ति की योजना के बारे में दो-तीन सप्ताह पहले से ही विचार विमर्श कर लेती तो यह नौबत न आती। 

दरअसल महामारी से पहले देश में 1000 से 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत प्रतिदिन होती थी, जो कि अब बढ़कर 5000 मीट्रिक टन पहुंच गई है। मांग में तेजी के चलते सप्लाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है। इसके अलावा लिक्विड ऑक्सीजन को पहुंचाने के लिए भी भारत में क्रायोजेनिक टैंकर्स की संख्या 1200 से 1500 है। यह भी एक बड़ा कारण है कि अचानक से माँग बढ़ने से ऑक्सीजन की सप्लाई में परेशानी हो रही है।

क्या भारत में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है?

भारत में हर दिन ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता 7100 मीट्रिक टन है। जबकि सभी राज्यों की कुल संयुक्त मांग 6775 मीट्रिक टन ही है। ऐसे में यह कह सकते हैं कि भारत में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन के उत्पादन क्षमता है। बस वितरण तंत्र में खामी के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

ऑक्सीजन की कमी की समस्या को हल करने के लिए भारत क्या कर रहा है?

ऑक्सीजन की सप्लाई करने के लिए टैंकरों को रिफलिंग के लिये भारतीय रेलवे और कार्गो विमानों का उपयोग करके खाली टैंकरों को उत्पादन केंद्र तक पहुंचाया जा रहा है। उत्पादन केंद्र से भरे हुए ऑक्सीजन टैंकर को सड़क मार्ग की सहायता से वितरित किया जा रहा है। देश में नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाली कंपनी टाटा समूह ने लिक्विड ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्ट के लिए विदेश से 24 विशेष कंटेनर का आयात कर रहा है। सरकार ने आर्गन और नाइट्रोजन गैस के टैंकरों को ऑक्सीजन के टैंकर में बदलने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ हफ्ते में ऑक्सीजन उत्पादन और वितरण प्रणाली में नाटकीय रूप से सुधार देखने को मिल सकता है।

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Archana Yadav

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