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वैज्ञानिक नांबी नारायणन को मिला 1.30 करोड़ का मुआवजा | ISRO जासूसी कांड

Rocketry: The Nambi Effect Documentary

Rocketry | Nambi Narayan In Hindi: अभी हाल में ही आर माधवन की फिल्म रॉकेट्री : द नंबी इफेक्ट (Rocketry: The Nambi Effect) का ट्रेलर लॉन्च हुआ है। जिसे लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। बता दे आर माधवन ने एक्टिंग में लोहा बनाने के बाद इस फिल्म के साथ निर्देशक के रूप में अपनी नई पारी शुरुआत की है। इस फिल्म में एक भारतीय वैज्ञानिक नम्बी नारायण की बायोपिक को दिखाया गया है, जिसे हर भारतीय को जरूर देखना चाहिए।

यह फिल्म भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक एवं एयरोस्पेस इंजीनियर नंबी नारायण की बॉयोपिक को दिखाया गया है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह देश से गद्दारी करने के एक झूठे आरोप ने एक वैज्ञानिक की जिंदगी तबाह कर दी? कैसे एक निर्दोष देशभक्त को राजनीतिक साजिश में फंसा कर उन्हें गद्दार कहा गया? लेकिन उन्होंने अपने हक के लिए लड़ाई लड़ी। लंबी लड़ाई के बाद यह साबित हो गया कि वह निर्दोष हैं और उन पर लगाये गए सारे आरोप झूठे है।

नम्बी नारायण का परिचय – नंबी नारायण का जन्म 12 दिसंबर 1941 को तिरुवनंतपुरम में हुआ था। उन्होंने पहली बार 1966 में थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन, तिरुवनंतपुरम में इसरो के अध्यक्ष विक्रम साराभाई से मुलाकात की था, वहां पर उन्हें एक पेलोड इंटीग्रेटेड के रूप में काम करने का अवसर मिला। उस समय तक भारत में स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर के चेयरमैन विक्रम साराभाई केवल उच्च योग्य पेशेवरों की भर्ती किया करते थे।

इसलिए नम्बी नारायण अपनी एमटेक डिग्री के लिए तिरुवनंतपुरम के एक कॉलेज में इंजीनियरिंग में दाखिला लेते हैं। इसके बाद नासा के द्वारा उन्हें फेलोशिप मिल जाती है और 1969 में वह वेस्टर्न विश्वविद्यालय में एडमिशन लेते हैं और 10 महीने में प्रोफेसर क्रोको के रासायनिक रॉकेट नोदन में अपना मास्टर्स पूरा किया। उन्हें अमेरिका में नौकरी का अवसर भी मिलता है। लेकिन इसके बावजूद वह भारत लौट आते हैं और भारत में अपनी सेवाएं देते हैं।

 बता देंगे उस समय भारत में रॉकेट में ठोस ईंधन का प्रयोग किया जाता था। जबकि नंबी नारायण अमेरिका से तरल ईंधन में विशेषज्ञता हासिल करके भारत लौटे थे। इसी के साथ 1970 के दशक में भारत तरल ईंधन रॉकेट टेक्नोलॉजी का प्रयोग करना आरंभ करता है। उन्हें तत्कालीन इसरो अध्यक्ष सतीश धवन और उनके उत्तराधिकारी यूआर राव से प्रोत्साहन भी मिला। उन्होंने 1970 के दशक के मध्य में 600 किलोग्राम का इंजन निर्माण किया ,जो बड़े इंजनों को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

नम्बी नारायण पर जासूसी का आरोप – 1994 में नम्बी नारायण पर जासूसी का आरोप लगाया गया। यह झूठा आरोप था। दरअसल अक्टूबर 1994 में मालदीव देश की एक महिला मरियम राशिदा को तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार कर लिया गया था और राशिदा पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने इसरो के स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन की ड्राइंग पाकिस्तान को बेच दी है। इस आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद केरल पुलिस ने 1994 में तिरुवनंतपुरम से ही इसरो के टॉप साइंटिस्ट और क्रायोजेनिक इंजन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर नम्बी नारायण और उनके दो अन्य साथी डीसी कुमारन और डिप्टी डायरेक्टर के चंद्रशेखर को भी अरेस्ट कर लिया गया था। इसके अलावा रूसी स्पेस एजेंसी की एक भारतीय प्रतिनिधि एसके शर्मा लेबर कांट्रैक्टर और राशिद की दोस्त मरियम हसन को भी षड्यंत्र के तहत गिरफ्तार किया गयाI

इन सभी पर आरोप लगाया गया कि इसरो के स्वदेशी क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन से जुड़ी गुप्त जानकारी को उन्होंने पाकिस्तान समेत अन्य देशों को बेंच दी हैं। इसके बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारियों ने क्रायोजेनिक इंजन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर नम्बी नारायण से लंबी पूछताछ की। 

नम्बी नारायण का कहना है कि उनके खिलाफ षड्यंत्र उस वक्त रच दिया गया था जब रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के एक भारतीय प्रतिनिधि महिला त्रिवेंद्रम हवाईअड्डे पर 20 जून 1994 को के चंद्रशेखर से मुलाकात की। जासूसी षड्यंत्र अलग-अलग देश के अलग-अलग लोग पर थे, पर पीड़ित पर आरोप एक ही तरह के थे।

 जब मरियम की डायरी में शशि कुमारन का नाम मिला तो इसमें इसरो का नाम भी घसीटा गया और इससे वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में इसरो की गति धीमा करने का मौका मिल गया और उन्हें भी शिकार बना लिया गया।

बाद में जब सीबीआई ने जांच की तो जासूसी का मामला झूठा निकला और सभी आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गयाम लेकिन इससे नुकसान यह हुआ कि भारत उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में पिछड़ गया।

 नम्बि नारायण ने अपनी किताब “रेडी टू फायर : हाउ इंडिया एंड आई सर्वाइव द इसरो स्पाई केस” मे जासूसी मामले की एक एक कड़ी को उधेरा है। इसी में इस बात का खुलासा होता है कि भारत के क्रायोजेनिक इंजन विकास में देरी कराने में अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र रचा गया था और भारत इस वजह से इस क्षेत्र में लगभग 15 साल पिछड़ गया। नम्बी नारायण की बायोपिक जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसका ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है।

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Archana Yadav

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