शेयर मार्केट

Algo Trading क्या होती है, इसके फायदे व नुकसान

What is Algo Trading: अल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading) भी एक प्रकार की ट्रेडिंग है। इसमें शेयर बाजार में ट्रेडिंग की जाती है। हालांकि यह अन्य सामान्य ट्रेडिंग (Trading) की तुलना में काफी अलग है। एल्गो ट्रेडिंग प्रमुख रूप से कंप्यूटर प्रोग्राम (Computer Program) के जरिए होती है और बाजार के हालात के अनुसार कंप्यूटर खुद निर्णय लेता है और ट्रेडिंग करता है।

 एल्गो ट्रेडिंग में कंप्यूटर प्रोग्राम की जरूरत होती है जिसमें मार्केट के डाटा (Deta) अपलोड किए जाते हैं। डाटा के आधार पर कंप्यूटर अपने आप ट्रेडिंग के लिए शेयर को चुनता है और शेयर को बेचने और खरीदने की सलाह देता है। इस तरह से ट्रेडिंग में हानि (Loss) होने की संभावना बेहद कम हो जाती है। 

हालांकि अभी यह बहुत ज्यादा लोकप्रिय नही है। अभी एल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading) बड़े पैमाने पर ट्रेड करने वाले निवेशक (Investor) है और इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

Meaning of Algo Trading –

एल्गो ट्रेडिंग का अर्थ होता है एल्गोरिदम तकनीक पर आधारित है। इसमें कंप्यूटर प्रोग्राम बनाया जाता है और शेयर बाजार की तकनीकी डाटा को विश्लेषण (Analysis) करके उसमें set कर दिया जाता है। इसमें deta fix करने के बाद कंप्यूटर प्रोग्राम मार्केट के रुख के अनुसार शेर का विश्लेषण करता है और संभावित प्रॉफिट और लास्ट की जानकारी कैलकुलेशन के जरिए बताता है, जो कि एक आम इंसान के लिए तेजी से करना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में इससे समय की बचत होती है। इसमें एल्गो ट्रेडिंग में code के जरिए कुछ नियम बनाए जाते हैं। जिससे तुरंत design लेने में मदद मिलती है।

भारत में Algo Trading सेवा देने वाले Stock Broker –

  • 5paisa 
  • स्टॉक ब्रोकर 
  • रिलायंस सिक्योरिटीज
  •  अरिहंत कैपिटल ब्रोकर
  •  फॉक्स ट्रेडर 
  • जेरोढा ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म
  • SMC ग्लोबल 
  • मास्टर ट्रस्ट सिक्योरिटीज

Algo Trading NSE –

भारतीय सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने 3 अप्रैल 2008 को भारत में अल्गो ट्रेडिंग की शुरुआत की थी। उस समय भारत में संस्थागत ग्राहकों के लिए डायरेक्ट मार्केट एक्सेस की सुविधा मिलती थी। SEBI के साथ NSE एल्गो ट्रेडिंग को और अधिक विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जून 2010 में विभिन्न ब्रोकिंग फर्मों को लीज पर अतिरिक्त लोकेशन सर्वर की शुरुआत की गई जिससे एल्गो ट्रेडिंग की स्पीड में काफी सुधार हुआ।

एल्गो ट्रेडिंग के फायदे  –

  • एल्गो ट्रेडिंग की मदद से आप शेयर मार्केट में कोड बना सकते हैं, जिससे आप इक्विटी, फॉरेक्स कमोडिटी जैसे सेगमेंट का इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं।
  •  एल्गो ट्रेडिंग में कंप्यूटर प्रोग्राम खुद ही निवेश के बारे में निर्णय लेता है। ऐसे में गलती की संभावना बेहद कम या न के बराबर रहती है।
  •  एक ही कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट इंडिकेट को देखकर ट्रेडिंग करने में मदद मिलती है।
  • एल्गो ट्रेडिंग पूरी तरह से ऑटोमेटेड होने की वजह से ट्रेडिंग करने के मौके से चूकने की संभावना न के बराबर रहती है। 

एल्गो ट्रेडिंग के नुकसान –

  •  एल्गो ट्रेडिंग आने वाले समय में ट्रेडिंग का भविष्य कहा जाने लगा है। 
  • बदलते समय के साथ इसे तकनीक के जरिए और बेहतर बनाया जा सकेगा।
  •  एल्गो ट्रेडिंग करने के लिए निवेश के हिसाब से ज्यादा पैसे की जरूरत होती है, जिससे आप निवेश कर सके।
  •  फिलहाल अल्गो ट्रेडिंग में कुछ खामियां हैं जैसे कि कभी कुलेशन में गलती होती है तो बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है।
  • अगर आप शेयर बाजार में नए हैं तब आपको एल्गो ट्रेडिंग से बचना चाहिए क्योंकि यह थोड़ी मुश्किल तकनीकी है। 
  • इसके लिए अलग तरह की विशेष रणनीति अपनानी होती है।
  • एल्गो ट्रेडिंग भले ही पूरी तरह से ऑटोमेटेड है। लेकिन इसमें रोजाना ध्यान रखना जरूरी होता है जिससे इसकी खामियों का पता चल सके।
  •  कुछ एक्सपीरियंस के बाद आप पहले एल्गो ट्रेडिंग करना शुरू कर सकते हैं।
यह भी देखे : आइये जाने Insider Trading क्या होती है, यह काम कैसे करती है?

Archana Yadav

मुझे नए नए टॉपिक्स में लेख लिखना पसंद हें, मेरे लेख पढ़ने के लिए शुक्रिया आपको केसा लगा कॉमेंट करके ज़रूर बताए.

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